चोरी हो चुके लाखों भारतीयों के Data और ID कार्ड की हो रही है बिक्री डार्क नेट पर ध्यान से पढ़ें पूरी खबर|

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बेहद हैरतअंगेज तरीके से 1 Lakh से ज्यादा Indians के ID डार्क वेब (Dark Web पर भारतीय राष्ट्रीय आईडी बेचने पर) बिक्री के लिए आ चुके हैं। ये आधार कार्ड (Aadhaar Card ), पैन कार्ड से लेकर पास (Pasport) तक हैं।

Cyble Crime के लिए इस्तेमाल होने वाले Dark Web ने हाल ही में लाखों की संख्या में भारतीयों का Data चुरा लिया है और उनकी स्कैन्ड कॉपी सीक्रेट तरीके से बेची जा रही है। इसकी खुलासा साइबर खुफिया एजेंसी साइबल (Cyble) ने 3 June को किया, जिसके बाद से तहलका मचा हुआ है। जानिए, क्या कहती है Cyble खुफिया Agencies और क्या है Dark Web…

साइबल ने Internet की खुफिया साइटों पर लाखों की संख्या में आईडी की स्कैन्ड कॉपीज देखीं। इसमें हेपोर्स, Aadhaar Card और पैन कार्ड जैसी चीजें थीं, जो बौद्धिक रूप से बेची जा रही थीं। गिरने से करने पर पता चला कि डार्क साइट पर भारतीयों को 1 Lakh से ज्यादा Id’s हैं, जिनकी बिक्री चालू है। Cyble इन से 1000 ID’s डार्क नेट से हटा दिया गया है और गिरने की प्रक्रिया चालू है।

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Hindustan Times में आई Report के मुताबिक इसपर साइबल के अधिकारियों ने कहा कि डेटा सरकार की ओर से लीक नहीं दिखता है, लेकिन लगता है कि Third Party ने इसे लीक किया है। इसे किसी अचर्चित एक्टर की प्रोफाइल के जरिए बेचा जा रहा है। पड़ताल में पता चला कि एक्टर के पास देश के अलग-अलग हिस्सों के 1 Lakh से ज्यादा आईडी हैं। इन आईडी का इस्तेमाल अपराधी लोगों के बीच जाने और खुद को आम इंसान बताते हैं कि सबका यकीन हासिल करने में करते हैं।

माना जा रहा है कि आईडी की स्कैन्ड कॉपी किसी कंपनी के ‘Know Your Customer’ (KYC) से चुराई गई है। खुफिया एजेंसी के मुताबिक हाल के वक्त में केवाईसी और बैंकिंग स्कैम दोनों बढ़े हैं। एजेंसी का मानना ​​है कि बैंकों से थर्ड पार्टी ये आईडी चुरा रही है और डार्क नेट के जरिए साइबर क्रिमिनल्स को उसे ऊंचे दाम पर बेच रही है। मई में भी खुफिया एजेंसी ने खतरे की तरफ आगाह किया था। इसके अनुसार 7.65 से ज्यादा भारतीयों की निजी जानकारी डार्क नेट पर बेची जा रही थी।

पड़ताल में पाया गया कि इनमें से 4.75 वो लोग हैं, जो ट्रूकॉलर का इस्तेमाल करते हैं. लाखों डाटा नौकरी की Website से चुराए गए.

वैसे Internet की खुफिया दुनिया डार्क नेट का नाम इन दिनों काफी उछला हुआ है। ऐसी कई घटनाएं हुई हैं, जिनमें डार्क नेट पर अपराधी कोरोना से रिकवर हुए मरीज का खून और चेहरे, वेंटिलेटर जैसी जरूरी चीजें तक गैस दिखते हैं। ऑस्ट्रेलियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिमिनोलॉजी ने डार्क नेट पर इस खून की अवैध बिक्री का खुलासा किया है। इम लोग इसे खरीद रहे हैं ताकि वे Corona के लिए इम्यून हो सकें।

Dark Net Internet दुनिया का ऐसा सीक्रेट संसार है, जहां कुछ ही शेजर के जरिए पहुंचा जा सकता है और ये सर्च इंजन में भी नहीं आता है। नेट का ये खुफिया संसार काफी फैला हुआ है। वर्ष 2015 में लंदन की किंग्स यूनिवर्सिटी ने इसपर 5 सप्ताह तक शोध किया। बहुत ही दिनों में 2,723 डार्क वेब इवेंट्स का पता चला। जब के साथ-साथ हालात और बिगड़ रहे हैं। साल 2019 की एक रिसर्च, जिसे यूनिवर्सिटी ऑफ सर्रे के डॉ। माइकल मैकगुर्वेस ने किया था, इसमें कई बातें निकलकर आईं। जैसे साइबर क्रिमिनल्स की तेजी से बढ़ी संख्या और गलत कामों की ओर युवाओं का रुझान बढ़ता है। Tor Internet के माध्यम से लगातार जानने के लोग इससे जुड़ने लगे हैं, जिनके मस्तिष्क में किसी भी तरह की खुराफात रहती है।

Dark Web की दुनिया अपने-आप में काफी महत्वपूर्ण है। इसका इस्तेमाल खुद में अवैध नहीं क्योंकि अज्ञात होने के बाद भी आपके पास एनक्रिप्शन होता है लेकिन Dark Web के जरिए आप जिस काम से जुड़ रहे हों, वह अवैध हो सकता है। जैसे किसी के Credit Card का पासवर्ड लेना, नशे की खरीद-फरोख्त से जुड़ना या पोर्नोग्राफी में शामिल हो जाना।

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